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श्रीमद्भागवत प्रश्नोत्तर (पेज 2) — 429 प्रश्न

श्रीमद्भागवत से जुड़े 429 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 429 प्रश्न

युधिष्ठिर को राज्य वापस कैसे मिला?

कृष्ण ने युधिष्ठिर को वह राज्य वापस दिलाया जिसे छल से छीन लिया गया था और द्रौपदी का अपमान करने वाले राजाओं का वध कराया।

युधिष्ठिरकृष्णराज्य
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कृष्ण ने युद्ध के बाद पांडवों को कैसे संभाला?

कृष्ण ने शोकाकुल लोगों को काल की गति समझाकर सांत्वना दी, युधिष्ठिर को राज्य दिलाया और उनके यश के लिए तीन अश्वमेध यज्ञ कराए।

कृष्णपांडवयुद्ध के बाद
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महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने क्या किया?

युद्ध के बाद पांडव कृष्ण के साथ गंगा तट गए, मरे हुए स्वजनों को जलांजलि दी, विलाप किया और गंगाजल में स्नान किया।

महाभारत युद्धपांडवगंगा तर्पण
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अश्वत्थामा ब्रह्मास्त्र और परीक्षित की कथा क्या है?

अश्वत्थामा ने पांडव वंश मिटाने के लिए ब्रह्मास्त्र छोड़ा, लेकिन कृष्ण ने उत्तरा के गर्भ में परीक्षित की रक्षा कर दी।

अश्वत्थामा ब्रह्मास्त्रपरीक्षितउत्तरा
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परीक्षित कौन थे?

परीक्षित उत्तरा के गर्भ में वह बालक थे जिनकी रक्षा कृष्ण ने अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से की, ताकि पांडव वंश बना रहे।

परीक्षितउत्तराकृष्ण
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पांडवों ने युद्ध के बाद अंतिम संस्कार कैसे किया?

अश्वत्थामा को दंड देने के बाद पांडवों ने कृष्णा द्रौपदी के साथ मृत भाई-बंधुओं की दाह आदि अंतिम क्रियाएँ कीं।

पांडवअंतिम संस्कारद्रौपदी पुत्र
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द्रौपदी और अश्वत्थामा की कथा क्या है?

अश्वत्थामा ने द्रौपदी के पुत्रों को मारा, पर बँधा हुआ लाए जाने पर द्रौपदी ने गुरु-पुत्र और ब्राह्मण समझकर उसे छोड़ने को कहा।

द्रौपदीअश्वत्थामाकृपी
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कृष्ण ने अश्वत्थामा को क्या दंड दिलाया?

कृष्ण ने अर्जुन से आततायी को दंड देने और पतित ब्राह्मण का वध न करने, दोनों आदेश निभाने को कहा; अंत में अश्वत्थामा की मणि छीनकर उसे निकाल दिया गया।

कृष्णअश्वत्थामा दंडअर्जुन
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ब्राह्मण को मृत्युदंड क्यों नहीं दिया गया?

अश्वत्थामा गुरु-पुत्र और ब्राह्मण था; इसलिए शारीरिक वध के स्थान पर मणि छीनना, सिर मूँड़ना और निकाल देना दंड माना गया।

ब्राह्मण दंडअश्वत्थामाद्रौपदी
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आततायी का मतलब क्या है?

आततायी वह है जो घोर हिंसक अपराध करे; टिप्पणी में आग लगाने वाला, विष देने वाला, हथियार लेकर हमला करने वाला आदि छह प्रकार बताए गए हैं।

आततायीधर्मअश्वत्थामा
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कृष्ण ने अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र के बारे में क्या कहा?

कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि यह अश्वत्थामा का ब्रह्मास्त्र है; वह इसे लौटाना नहीं जानता और इसका निवारण ब्रह्मास्त्र से ही होगा।

कृष्णअश्वत्थामाब्रह्मास्त्र
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अर्जुन और अश्वत्थामा की ब्रह्मास्त्र कथा क्या है?

अश्वत्थामा ने भय में ब्रह्मास्त्र चलाया; कृष्ण के कहने पर अर्जुन ने ब्रह्मास्त्र से उसका निवारण किया और फिर अश्वत्थामा को बाँध लिया।

अर्जुनअश्वत्थामाब्रह्मास्त्र
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अश्वत्थामा ब्रह्मास्त्र वापस क्यों नहीं ले पाया?

श्रीमद्भागवत के अनुसार अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र तो चला दिया, लेकिन उसे लौटाने की विधि वह नहीं जानता था।

अश्वत्थामाब्रह्मास्त्रकृष्ण
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अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र क्यों चलाया?

अश्वत्थामा ने अर्जुन को अपनी ओर आते देखा, अपने को असहाय पाया और प्राण बचाने के लिए ब्रह्मास्त्र चलाया।

अश्वत्थामाब्रह्मास्त्रअर्जुन
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अश्वत्थामा का ब्रह्मास्त्र क्या था?

अश्वत्थामा का ब्रह्मास्त्र ऐसा प्रचंड अस्त्र बताया गया है जिसका तेज सब दिशाओं में फैल गया और जिसे वह लौटाना नहीं जानता था।

अश्वत्थामा ब्रह्मास्त्रब्रह्मास्त्रकृष्ण
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अश्वत्थामा ने द्रौपदी के पुत्रों को क्यों मारा?

अश्वत्थामा ने दुर्योधन का प्रिय कार्य समझकर द्रौपदी के सोते हुए पुत्रों को मारा, पर यह कर्म दुर्योधन को भी अप्रिय लगा।

अश्वत्थामाद्रौपदी पुत्रदुर्योधन
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अश्वत्थामा की कथा क्या है?

अश्वत्थामा ने द्रौपदी के सोए हुए पुत्रों की हत्या की, ब्रह्मास्त्र चलाया, अर्जुन ने उसे पकड़ा और अंत में उसकी मणि निकालकर उसे शिविर से बाहर किया गया।

अश्वत्थामाद्रौपदी पुत्रब्रह्मास्त्र
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कृष्ण कथा सुनते-सुनते भक्ति कैसे बढ़ती है?

नारदजी ने श्रद्धा से कृष्ण कथा सुनी; पद-पद सुनते हुए भगवान में रुचि हुई और भक्ति प्रकट होकर रज-तम को हटाने लगी।

कृष्ण कथाभक्ति वृद्धिश्रवण
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दुनियावी सुख के पीछे भागना क्यों ठीक नहीं?

नारदजी कहते हैं कि विषय-सुख कर्मफल से अपने आप मिलते हैं, जैसे दुख मिल जाता है; बुद्धिमान को परम लक्ष्य के लिए प्रयत्न करना चाहिए।

दुनियावी सुखवैराग्यकर्मफल
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सिर्फ धर्म पालन से क्या भगवान मिलते हैं?

नारदजी कहते हैं कि केवल स्वधर्म पालन करने वाले और भगवान का भजन न करने वाले को वास्तविक लाभ क्या मिला, यह विचारणीय है।

धर्म पालनभक्तिस्वधर्म
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श्रीमद्भागवत — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर श्रीमद्भागवत श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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श्रीमद्भागवत को गहराई से समझने का तरीका

श्रीमद्भागवत के पेज 2 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

429 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।