विस्तृत उत्तर
अश्वत्थामा को तुरंत मृत्युदंड न देने के पीछे कई बातें जुड़ी हैं। द्रौपदी ने उसे बँधा हुआ देखकर कहा कि उसे छोड़ दिया जाए, क्योंकि वह ब्राह्मण है और गुरु-पुत्र है। उसने याद दिलाया कि द्रोणाचार्य की कृपा से अर्जुन ने धनुर्वेद और अस्त्रविद्या सीखी थी, और द्रोण पुत्ररूप में सामने खड़े हैं। उसने कृपी के शोक का भी विचार किया। दूसरी ओर भीम उसे मारना चाहते थे और कृष्ण ने भी आततायी होने के कारण दंड की बात कही। फिर कृष्ण ने अर्जुन से दोनों शास्त्रीय बातों का पालन करने को कहा: पतित ब्राह्मण का वध न करो और आततायी को दंड दो। अर्जुन ने अश्वत्थामा की मणि बालों सहित काटकर, उसका तेज छीनकर और शिविर से निकालकर दंड पूरा किया।
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