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श्रीमद्भागवत प्रश्नोत्तर (पेज 3) — 429 प्रश्न

श्रीमद्भागवत से जुड़े 429 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 429 प्रश्न

सकाम कर्म से बचना क्यों जरूरी है?

नारदजी चेतावनी देते हैं कि विषयों में फँसे लोगों को सकाम कर्म मुख्य धर्म जैसा लग सकता है, इसलिए भगवान की भक्ति की दिशा जरूरी है।

सकाम कर्मधर्मभक्ति
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भगवान को समर्पित कर्म क्या है?

भगवान को समर्पित कर्म वह है जो शास्त्र-विहित होकर भगवान की प्रसन्नता के लिए किया जाए और कृष्ण नाम-स्मरण से जुड़ा हो।

समर्पित कर्मभगवदर्थ कर्मभक्ति योग
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साधारण भाषा में भगवान का नाम हो तो क्या वह पवित्र होती है?

हाँ। नारदजी कहते हैं कि दोषयुक्त वाणी भी यदि भगवान के नाम और यश से युक्त हो तो साधु उसे सुनते और गाते हैं।

भगवान का नामभाषाहरि यश
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भगवान की महिमा गाना क्यों जरूरी है?

नारदजी कहते हैं कि भगवान की महिमा के बिना ज्ञान और कर्म शोभा नहीं पाते; सभी साधनों का लक्ष्य कृष्ण गुणों का वर्णन है।

भगवान की महिमाकृष्ण कीर्तनहरि यश
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भागवत कथा शुकदेव से परीक्षित तक कैसे पहुँची?

शौनकजी कहते हैं कि भगवान शुकदेवजी ने पुण्यमयी भागवत कथा कही और पूछते हैं कि उनका परीक्षित से संवाद कैसे हुआ।

भागवत कथाशुकदेवपरीक्षित
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नारद और व्यास संवाद क्या है?

नारद-व्यास संवाद की भूमिका है: व्यासजी अपने अधूरेपन पर विचार कर रहे थे, तभी नारदजी आए और व्यासजी ने उनका विधिपूर्वक पूजन किया।

नारद व्यास संवादव्यास असंतोषनारद
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परीक्षित ने भागवत कथा क्यों सुनी?

कारण का पूरा विस्तार आगे की कथा में आता है। शौनकजी पूछते हैं कि शुकदेव और परीक्षित का संवाद कैसे हुआ जिसमें भागवत कही गई।

परीक्षितभागवत कथाशुकदेव
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शुकदेव जी इतने बड़े योगी क्यों माने जाते हैं?

वे समदर्शी, भेदभावरहित, परमात्मा में स्थित और इतनी विरक्त दृष्टि वाले थे कि स्त्री-पुरुष भेद भी नहीं देखते थे।

शुकदेव योगीवैराग्यसमदर्शी
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वेदव्यास कौन थे?

वेदव्यास पराशर और सत्यवती के पुत्र, भगवान के कलावतार योगीराज, वेद-विभाजक और महाभारत रचने वाले महामुनि बताए गए हैं।

वेदव्यासव्यासजीपराशर
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कलियुग में भागवत को सूर्य क्यों कहा गया है?

कृष्ण के धाम जाने पर जब कलियुग में लोग अज्ञान-अंधकार से अंधे हो रहे थे, तब भागवत पुराण सूर्य के समान प्रकट हुआ।

कलियुगभागवत सूर्यअज्ञान
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परीक्षित ने गंगा तट पर भागवत क्यों सुनी?

इतना बताया गया है कि परीक्षित गंगातट पर आमरण अनशन का व्रत लेकर ऋषियों से घिरे बैठे थे और शुकदेवजी ने उन्हें भागवत सुनाई।

परीक्षितगंगा तटभागवत श्रवण
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कृष्ण से अनन्य प्रेम करने का फल क्या है?

जो भगवान वासुदेव से सर्वात्मभाव और अनन्य प्रेम करते हैं, वे जन्म-मरण रूप संसार के भयंकर चक्र में फिर नहीं पड़ते।

कृष्ण प्रेमअनन्य प्रेमजन्म मृत्यु
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भगवान संसार रचकर भी अलग कैसे रहते हैं?

भगवान लीला से संसार की सृष्टि, पालन और संहार करते हैं, पर उसमें आसक्त नहीं होते और सबके भीतर रहते हुए भी स्वतंत्र रहते हैं।

भगवानसृष्टिलीला
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माया दूर होने पर जीव को क्या अनुभव होता है?

जब अविद्या से बना स्थूल-सूक्ष्म शरीर का आरोप मिटता है, तब ब्रह्म का साक्षात्कार होता है और जीव अपनी स्वरूप-महिमा में स्थित होता है।

मायाजीवआत्मज्ञान
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सूक्ष्म शरीर और जीव का संबंध क्या है?

स्थूल रूप से परे सूक्ष्म शरीर बताया गया है; आत्मा का उसमें आरोप या प्रवेश होने से वही जीव कहलाता है और उसका पुनर्जन्म होता है।

सूक्ष्म शरीरजीवपुनर्जन्म
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भगवान के स्थूल रूप का मतलब क्या है?

भगवान का स्थूल जगदाकार रूप उनकी माया के महत्तत्त्व आदि गुणों से उनमें कल्पित बताया गया है; वह उनका वास्तविक प्राकृत रूप नहीं है।

स्थूल रूपजगदाकार रूपमाया
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परशुराम अवतार क्यों हुआ?

परशुराम अवतार तब हुआ जब राजाओं को ब्राह्मणों का द्रोही देखकर भगवान ने क्रोध में पृथ्वी को इक्कीस बार क्षत्रिय-विहीन किया।

परशुराम अवतारक्षत्रियब्राह्मण
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मत्स्य अवतार ने मनु को कैसे बचाया?

चाक्षुष मन्वंतर के अंत में जब लोक समुद्र में डूब रहे थे, भगवान ने मत्स्य रूप लेकर पृथ्वी रूपी नाव पर वैवस्वत मनु की रक्षा की।

मत्स्य अवतारवैवस्वत मनुप्रलय
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श्रीमद्भागवत — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर श्रीमद्भागवत श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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श्रीमद्भागवत को गहराई से समझने का तरीका

श्रीमद्भागवत के पेज 3 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

429 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।