विस्तृत उत्तर
बताया गया है कि श्रीमद्भागवत में सारे वेद और इतिहासों का सार-सार संग्रह किया गया है। शुकदेवजी ने इसे महाराज परीक्षित को सुनाया। उस समय राजा परीक्षित गंगातट पर आमरण अनशन का व्रत लेकर बैठे थे और परम ऋषियों से घिरे हुए थे। यह प्रसंग भागवत-कथा की परंपरा को स्पष्ट करता है: वेदव्यास ने लोक-कल्याण के लिए भागवत बनाई, अपने आत्मज्ञानी पुत्र शुकदेवजी को ग्रहण कराई, और शुकदेवजी ने उसे परीक्षित को सुनाया। परीक्षित की बाद की विस्तृत कथा नहीं दी गई, पर यह साफ है कि गंगातट पर, ऋषियों की सभा में, शुकदेवजी ने भागवत का उपदेश दिया।
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