विस्तृत उत्तर
वेदव्यास को भगवान का कलावतार और योगीराज कहा गया है। उनका जन्म वर्तमान चतुर्युगी के तीसरे युग द्वापर में महर्षि पराशर से वसुकन्या सत्यवती के गर्भ से हुआ। वे भूत और भविष्य को जानने वाले, अचूक दृष्टि वाले महर्षि बताए गए हैं। उन्होंने समय के प्रभाव से लोगों की घटती शक्ति, कम आयु, कम बुद्धि और धर्म-संकरता को देखकर सब वर्णों और आश्रमों के हित पर विचार किया। फिर एक वेद को चार भागों में विभाजित किया और इतिहास-पुराण की परंपरा को भी व्यवस्थित किया। स्त्री, शूद्र आदि के कल्याण के लिए उन्होंने महाभारत की रचना की। फिर भी उन्हें संतोष न हुआ, क्योंकि उन्हें लगा कि भगवान को प्राप्त कराने वाले धर्मों का पर्याप्त निरूपण नहीं हुआ।
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