विस्तृत उत्तर
भागवत कथा के शुकदेव से परीक्षित तक पहुँचने का पूरा वृत्तांत नहीं, बल्कि उसकी जिज्ञासा सामने आती है। शौनकजी सूतजी से कहते हैं कि वे वही पुण्यमयी भगवान की कथा सुनाएँ जो भगवान शुकदेवजी ने कही थी। वे पूछते हैं कि वह कथा किस युग, किस स्थान और किस कारण से हुई। फिर वे विशेष रूप से जानना चाहते हैं कि पांडुनंदन राजर्षि परीक्षित का मौनी शुकदेवजी के साथ संवाद कैसे हुआ, जिसमें यह भागवत संहिता कही गई। शौनकजी शुकदेवजी के वैराग्य का वर्णन करते हुए कहते हैं कि वे गृहस्थों के घर बहुत थोड़ी देर ही रुकते थे, वह भी घर को तीर्थ बनाने के लिए। इसलिए कथा-परंपरा का संकेत यह है: शुकदेवजी ने भागवत कही, परीक्षित ने उनसे संवाद किया, और शौनकजी अब सूतजी से उसका पूरा विवरण सुनना चाहते हैं।
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