विस्तृत उत्तर
व्यासजी द्वारा एक वेद को चार भागों में विभाजित करने के बाद चार वेदों के नाम दिए गए हैं। वे हैं ऋक्, यजुः, साम और अथर्व। पाठ आगे यह भी बताता है कि इन वेदों का अध्ययन और परंपरा अलग-अलग ऋषियों से जुड़ी। ऋग्वेद के लिए पैल, सामवेद के लिए जैमिनि, यजुर्वेद के लिए वैशम्पायन और अथर्ववेद के लिए सुमन्तु मुनि का उल्लेख आता है। इतिहास और पुराण के ज्ञाता के रूप में रोमहर्षण का नाम दिया गया है। इस प्रकार चार वेदों की सूची और उनके परंपरा-विभाजन का संक्षिप्त संकेत मिलता है। मुख्य बात यह है कि व्यासजी ने लोगों की क्षमता देखकर एक वेद को चार वेदों में व्यवस्थित किया।
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