विस्तृत उत्तर
स्थूल जगदाकार रूप से परे एक सूक्ष्म रूप या सूक्ष्म शरीर की बात कही गई है। यह स्थूल शरीर की तरह आकार आदि गुणों वाला नहीं है और देखने-सुनने में भी नहीं आता। पाठ कहता है कि आत्मा का आरोप या प्रवेश होने से यही जीव कहलाता है और उसी का बार-बार जन्म होता है। इसका अर्थ है कि जीव की पुनरावृत्ति सूक्ष्म शरीर के संबंध से समझाई गई है। यहाँ सूक्ष्म शरीर को इंद्रियों से पकड़ में आने वाली वस्तु नहीं माना गया, बल्कि वह जन्म-मरण के प्रवाह से जुड़ा आधार है। यह भी आगे बताया गया है कि स्थूल और सूक्ष्म शरीर अविद्या से आत्मा में आरोपित हैं; ज्ञान से यह आरोप हटने पर ब्रह्म का साक्षात्कार होता है।
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