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जीव से जुड़े सभी प्रश्न(26)

जीव पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 26 प्रश्न उपलब्ध हैं।

आत्मा सिद्धांत

पेड़-पौधों में आत्मा होती है क्या — शास्त्रीय प्रमाण?

हाँ। मनुस्मृति (1.49): वनस्पति = उद्भिज्ज जीव। महाभारत (शांति पर्व 184): वृक्षों में जीवात्मा, सुख-दुख अनुभव। पद्म पुराण: 20 लाख योनियाँ पेड़-पौधों। जगदीश चंद्र बोस ने वैज्ञानिक रूप से सिद्ध किया। पीपल/तुलसी पूजा इसीलिए।

#पेड़ पौधे#आत्मा#जीव
श्रीमद्भागवत

माया दूर होने पर जीव को क्या अनुभव होता है?

जब अविद्या से बना स्थूल-सूक्ष्म शरीर का आरोप मिटता है, तब ब्रह्म का साक्षात्कार होता है और जीव अपनी स्वरूप-महिमा में स्थित होता है।

#माया#जीव#आत्मज्ञान
श्रीमद्भागवत

सूक्ष्म शरीर और जीव का संबंध क्या है?

स्थूल रूप से परे सूक्ष्म शरीर बताया गया है; आत्मा का उसमें आरोप या प्रवेश होने से वही जीव कहलाता है और उसका पुनर्जन्म होता है।

#सूक्ष्म शरीर#जीव#पुनर्जन्म
श्रीमद्भागवत

भगवान सबमें एक होकर भी अलग-अलग कैसे दिखते हैं?

भगवान एक हैं, पर जैसे एक अग्नि अलग-अलग लकड़ियों में अनेक-सी दिखती है, वैसे ही वे अनेक जीवों में अलग-अलग से जान पड़ते हैं।

#भगवान#जीव#सृष्टि
जीव और इन्द्रियाँ

मन को उभयात्मक क्यों कहा गया है?

मन को पाँच ज्ञानेन्द्रियों और पाँच कर्मेन्द्रियों के साथ जीव के लिए उभयात्मक बताया गया है।

#मन#उभयात्मक#ज्ञानेन्द्रियाँ
जीव और इन्द्रियाँ

पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ और पाँच कर्मेन्द्रियाँ क्यों बनाई गईं?

शब्द, स्पर्श आदि को ग्रहण करने के लिए पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, पाँच कर्मेन्द्रियाँ और मन बनाए गए।

#ज्ञानेन्द्रियाँ#कर्मेन्द्रियाँ#मन
पाशुपत तत्त्व

पशु और पाश का अर्थ किस विषय में बताया गया है?

पशु को जीव और पाश को बन्धन मानकर उनकी मीमांसा का विषय बताया गया है।

#पशु#जीव#पाश
सृष्टि तत्त्व

जीव और शिव का संबंध कैसे बताया गया है?

जीव को ध्याता और शिव को ध्येय के रूप में रखा गया है।

#जीव#शिव#ध्याता
सृष्टि तत्त्व

छब्बीस तत्त्वों का वर्णन कैसे किया गया है?

सोलह रूपों के साथ अव्यक्त, ध्याता जीव और ध्येय शिव आदि को लेकर छब्बीस रूप बताए गए हैं।

#छब्बीस तत्त्व#अव्यक्त#जीव
लोक

एकसूत्रीय जल में जीव कैसे रहते हैं?

जीव वहाँ शरीर से नहीं, सूक्ष्म कर्म-बीज रूप में रहते हैं।

#एकसूत्रीय जल#जीव#महाप्रलय
लोक

योगनिद्रा में जीवों के कर्म कहाँ जाते हैं?

वे विष्णु के भीतर अव्यक्त संस्कार रूप में सुरक्षित रहते हैं।

#योगनिद्रा#कर्म#जीव
लोक

विष्णु की योगनिद्रा में जीव कैसे रहते हैं?

सूक्ष्म कर्म-संस्कार रूप में।

#योगनिद्रा#जीव#कर्म संस्कार
लोक

कारण जल में जीव कहाँ थे?

सूक्ष्म रूप में विश्राम कर रहे थे।

#कारण जल#जीव#महाप्रलय
लोक

माया के आवरण में फँसा जीव क्या भूल करता है?

माया में फँसा जीव भगवान की परम सत्ता और कालरूप सुदर्शन चक्र को भूल जाता है।

#माया#जीव#सुदर्शन चक्र
पाशुपत अस्त्र साधना

शैव सिद्धांत में 'पशु' का क्या अर्थ है?

माया के बंधन में बंधे हुए जीव या आत्मा को शैव सिद्धांत में 'पशु' कहा गया है।

#पशु#जीव#शैव सिद्धांत
जीवन एवं मृत्यु

नरक में जीव को किस स्थिति में रखा जाता है?

नरक में जीव — जंजीरों में बँधा, पीठ पर लोहे का भार, रक्त वमन करता, निरंतर विलाप करता। मानसिक रूप से भय और पश्चाताप में, आत्मिक रूप से विवश, सामाजिक रूप से पूर्णतः अकेला।

#नरक#स्थिति#जीव
जीवन एवं मृत्यु

वैतरणी नदी में जीव को किन-किन प्रकार के जीव काटते हैं?

वैतरणी में सूई-मुख कीड़े (शरीर में चुभते हैं), वज्र-चोंच गीध और कौए (नोचते हैं), वज्रदन्त घड़ियाल (पकड़कर खींचते हैं), महाविषधर सर्प-बिच्छू (डसते हैं) और मांसभक्षी पक्षी — ये सभी पापी जीव को कष्ट देते हैं।

#वैतरणी नदी#जीव#कीड़े
जीवन एवं मृत्यु

नरक में जीव को किन जीवों द्वारा कष्ट दिया जाता है?

नरक में कुत्ते (नोचना-काटना), सर्प-बिच्छू (दंश), वज्र-चोंच गीध, राक्षस (खाना), कौए-चील, और सूई-मुख कीड़े जीव को कष्ट देते हैं। प्रत्येक जीव उस पापी के कर्म का प्रतिफल है।

#नरक#जीव#कष्ट
जीवन एवं मृत्यु

चित्रगुप्त जीव से क्या पूछते हैं?

चित्रगुप्त जीव से उसके कर्म, दान और धर्म के विषय में पूछते हैं। झूठ बोलने पर कर्मों का दृश्य प्रमाण दिखाते हैं। यमराज को पाप-पुण्य का सटीक विवरण देते हैं — उनके समक्ष कोई बचाव नहीं चलता।

#चित्रगुप्त#न्याय#जीव
जीवन एवं मृत्यु

यमदूतों की उपस्थिति से जीव की क्या स्थिति होती है?

यमदूतों को देखकर पापी जीव अत्यंत भयभीत होता है, काँप उठता है, मल-मूत्र त्याग देता है और हाय-हाय करते हुए विलाप करता है। पछतावा होता है परंतु तब कुछ नहीं बदला जा सकता। पुण्यात्मा देवदूतों को देखकर प्रसन्न होता है।

#यमदूत#जीव#भय
जीवन एवं मृत्यु

क्या सभी जीव समान अनुभव करते हैं?

नहीं, गरुड़ पुराण के अनुसार सभी जीव समान अनुभव नहीं करते। पुण्यात्मा को देवदूत दिव्य विमान से ले जाते हैं, पापी को यमदूत कष्ट देते हैं। अनुभव पूर्णतः जीवन के कर्मों पर निर्भर है।

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जीवन एवं मृत्यु

क्या जीव को अपने कर्म याद आते हैं?

हाँ, गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद यममार्ग पर जीव को अपने पापकर्म याद आते हैं जिससे वह और अधिक पीड़ित होता है। पुण्यात्मा को सत्कर्मों की स्मृति शांति देती है। यमलोक में भी कर्मों का लेखा-जोखा होता है।

#जीव#कर्म#स्मृति
जीवन एवं मृत्यु

क्या मृत्यु के बाद जीव अपने परिवार को देखता है?

हाँ, गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद जीवात्मा 13 दिनों तक परिवार के पास रहकर उन्हें देखती है। वह पुकारती है परंतु परिवार सुन नहीं पाता। परिजनों का विलाप जीव को दुखी करता है — इसीलिए शांत भाव और पिंडदान का विधान है।

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जीवन एवं मृत्यु

क्या जीव अपने घर को देख सकता है?

हाँ, गरुड़ पुराण के अनुसार जीव शरीर छोड़ते समय अपने घर को देखता है। मृत्यु के बाद 13 दिनों तक घर के आसपास भटकता है, परिजनों को देखता है परंतु वे उसे नहीं देख पाते। यह अनुभव अत्यंत कष्टकारी होता है।

#जीव#घर#मृत्यु के बाद
जीवन एवं मृत्यु

यमदूत जीव को कैसे पकड़ते हैं?

गरुड़ पुराण के अनुसार यमदूत पापी जीव को बलपूर्वक पकड़ते हैं — जैसे राजपुरुष अपराधी को। उसे यातना-देह से ढककर गले में पाश बाँध देते हैं। पुण्यात्मा के लिए देवदूत दिव्य विमान से सम्मानपूर्वक ले जाते हैं।

#यमदूत#जीव#पाश
जीवन एवं मृत्यु

यमदूतों को देखकर जीव क्या करता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार यमदूतों को देखकर पापी जीव अत्यंत भयभीत होता है, काँप उठता है और मल-मूत्र त्याग देता है। वह हाय-हाय करता हुआ शरीर छोड़ता है। पुण्यात्मा के लिए देवदूत आते हैं जिन्हें देखकर शांति मिलती है।

#यमदूत#जीव#भय
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