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विस्तृत उत्तर
जीव और शिव का उल्लेख छब्बीस रूपों के वर्णन में आता है। ध्याता को जीव और ध्येय को शिव के रूप में रखा गया है। यह वर्णन महत्, अहंकार, पंच तन्मात्रा, इन्द्रियाँ, महाभूत, मन और अव्यक्त आदि तत्त्वों के क्रम में आता है। इसलिए उपलब्ध पाठ के आधार पर जीव को ध्याता और शिव को ध्येय के रूप में समझाया गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 1, PDF पृष्ठ 15, श्लोक 23-24
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