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विस्तृत उत्तर
पंचभूत पृथ्वी, जल, तेज, आकाश और वायु बताए गए हैं। लिंगतत्त्व को पंचभूतात्मक कहा गया है, अर्थात वह इन पाँच भूतों से युक्त है। आगे सृष्टि-क्रम में आकाश से वायु, वायु से अग्नि, अग्नि से जल और जल से पृथ्वी की उत्पत्ति भी कही गई है। इसी क्रम में पृथ्वी को पाँच गुणों से, जल को चार गुणों से, अग्नि को तीन गुणों से, वायु को दो गुणों से और आकाश को एक गुण से युक्त बताया गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 3, PDF पृष्ठ 20, श्लोक 4
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