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विस्तृत उत्तर
ब्रह्माण्ड अण्ड के सात प्राकृत आवरण बताए गए हैं। अण्ड को बाहर से अपनेसे दस गुने जल ने घेरा है। जल को दस गुने तेज ने, तेज को दस गुने वायु ने, और वायु को दस गुने आकाश ने आवृत किया है। आकाश तामस अहंकार से, तामस अहंकार महत्तत्त्व से, और महत्तत्त्व अव्यक्त प्रधान से आवृत बताया गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 3, PDF पृष्ठ 23-24, श्लोक 30-33
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