महिषासुर वधमहिषासुर का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?
महिष (भैंसा) = आलस्य, अज्ञान, तमोगुण। असुर = भीतर के पाँच विकार (काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार)। रूप बदलना = अहंकार की मायावी वृत्तियाँ। देवी द्वारा वध = भीतर के 'पशुत्व' और 'अहंकार' का मर्दन। मोक्ष = भीतर की परम चेतना (देवी) को पहचानना।
#महिषासुर आध्यात्मिक अर्थ#तमोगुण#पाँच विकार