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विस्तृत उत्तर
पंच तन्मात्राओं की उत्पत्ति अहंकार से कही गई है। अहंकार से सृष्टि को व्याप्त करनेवाली शब्द, स्पर्श आदि तन्मात्राएँ उत्पन्न होती हैं। तामस अहंकार से शब्द तन्मात्रावाला आकाश उत्पन्न हुआ। आकाश से स्पर्श तन्मात्रावाला वायु, वायु से रूप तन्मात्रावाली अग्नि, अग्नि से रस तन्मात्रावाला जल और जल से गन्ध तन्मात्रावाली पृथ्वी उत्पन्न हुई।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 3, PDF पृष्ठ 22, श्लोक 17-21
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