शिव पूजा नियमशिवलिंग को स्पर्श करना चाहिए या नहीं, शास्त्रों में क्या कहा गया है?शास्त्रों के अनुसार: शिवलिंग का शीर्ष (रुद्र) भाग सीधे स्पर्श न करें। पुरुष स्नान के बाद स्पर्श कर सकते हैं। महिलाओं के लिए सीधा स्पर्श अनेक परंपराओं में वर्जित — 'नंदी मुद्रा' का विकल्प है। अविवाहित कन्याओं के लिए विशेष मनाही। मासिक धर्म में स्पर्श सर्वथा वर्जित। विषय पर मतभेद विद्यमान हैं।#स्पर्श#शिवलिंग#नियम
विश्वव्यापक शिवशिव इन्द्रियों के विषयों में कैसे हैं?शिव को शब्द, स्पर्श, रस और गंध स्वरूप कहा गया है; उन्हें गंधी और गणों का अधिपति भी नमस्कार किया गया है।
उपसर्ग और सिद्धियाँवेदना सिद्धि क्या है?स्पर्श की अनुभूति को वेदना सिद्धि कहा गया है।#वेदना सिद्धि#स्पर्श#अनुभूति
सृष्टि तत्त्वपृथ्वी में पाँच गुण क्यों बताए गए हैं?पृथ्वी शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध पाँचों गुणों से युक्त बताई गई है।#पृथ्वी#पाँच गुण#शब्द
सृष्टि तत्त्वपंच तन्मात्रा कैसे उत्पन्न होती हैं?अहंकार से शब्द, स्पर्श आदि तन्मात्राएँ उत्पन्न होती हैं और उनसे भूतसर्ग आगे बढ़ता है।#पंच तन्मात्रा#शब्द#स्पर्श
सृष्टि तत्त्वपंच तन्मात्रा कौन सी हैं?पंच तन्मात्रा शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध हैं।#पंच तन्मात्रा#शब्द#स्पर्श
न्यास विधिन्यास क्या होता है?न्यास का अर्थ है 'स्थापित करना' — इसमें मंत्र उच्चारण करते हुए उंगलियों से शिवलिंग के विभिन्न भागों का स्पर्श कर मंत्र की चेतना-ऊर्जा स्थापित की जाती है। यह शिव का सूक्ष्म नादमय शरीर निर्मित करने जैसा है।#न्यास#मंत्र स्थापना#स्पर्श
महिला एवं धर्ममहिलाओं को शिवलिंग छूना चाहिए या नहींविवादित। मंदिर नियम अनुसार। घर=अनुमत। जलाभिषेक दूर से=सर्वमान्य। शिव=सबके देवता।#शिवलिंग#महिला#स्पर्श