📖
विस्तृत उत्तर
प्राधानिक सृष्टि, प्राकृत सृष्टि और वैकृत सृष्टि को लिङ्गपुराण में वर्णित विषयों के रूप में बताया गया है। क्रम यह दिया गया है कि सबसे पहले प्राधानिक, उसके बाद प्राकृत और फिर वैकृत सृष्टि का वर्णन है। इनके साथ अण्ड की उत्पत्ति और अण्ड के आठ आवरणों का वर्णन भी इसी विषय-सूची में रखा गया है।
📜
शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 2, PDF पृष्ठ 16, श्लोक 6
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?





