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विस्तृत उत्तर
छब्बीस तत्त्वों का वर्णन क्रम से किया गया है। पहले महत्, अहंकार और पंच तन्मात्रा को लेकर सात रूप बताए गए हैं। फिर दस इन्द्रियाँ, पाँच महाभूत और मन को मिलाकर सोलह रूप बताए गए हैं। इसके बाद इन सोलह रूपों के साथ अव्यक्त, ध्याता यानी जीव और ध्येय यानी शिव आदि को लेकर छब्बीस रूपों में व्यक्त होने का वर्णन आता है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 1, PDF पृष्ठ 15, श्लोक 23-24
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