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विस्तृत उत्तर
अहंकार तीन प्रकार का बताया गया है: सात्त्विक, राजस और तामस। महत्तत्त्व से संकल्प-अध्यवसायवृत्तिरूप सात्त्विक अहंकार उत्पन्न हुआ। उसी महत्तत्त्व से रजोगुण की अधिकता वाला राजस अहंकार और रजोगुण से आवृत तमोगुण की अधिकता वाला तामस अहंकार भी उत्पन्न बताया गया है। उसी अहंकार से शब्द, स्पर्श आदि तन्मात्राएँ उत्पन्न होती हैं।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 3, PDF पृष्ठ 22, श्लोक 17-18
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