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विस्तृत उत्तर
महत्तत्त्व की उत्पत्ति सृष्टि के समय बताई गई है। तीन गुणों से युक्त अजरूप पुरुष की आज्ञा से उसमें अधिष्ठित माया से महत्तत्त्व उत्पन्न हुआ। फिर सृष्टि करने की इच्छा से युक्त महत्तत्त्व ने अव्यय और अव्यक्त पुरुष में प्रवेश करके व्यक्त सृष्टि में विक्षोभ उत्पन्न किया। इसी से आगे अहंकार और तन्मात्राओं की उत्पत्ति का क्रम शुरू होता है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 3, PDF पृष्ठ 22, श्लोक 15-16
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