प्रलयप्रलय के बाद क्या बचता है?प्रलय के बाद केवल प्रधान यानी प्रकृति और पुरुष रह जाते हैं।#प्रलय#प्रधान#प्रकृति
प्रलयमहाप्रलय में क्या होता है?महाप्रलय में सम्पूर्ण सृष्टि का लय हो जाता है और शिव की आज्ञा से प्रलय का भी प्रलय होता है।#महाप्रलय#सृष्टि लय#शिव आज्ञा
सृष्टि तत्त्वमहत्तत्त्व कैसे उत्पन्न होता है?सृष्टि के समय तीन गुणों से युक्त अजरूप पुरुष की आज्ञा से अधिष्ठित माया से महत्तत्त्व उत्पन्न हुआ।
ॐकार और शब्दब्रह्मॐकार को प्रकृति और पुरुष से परे क्यों कहा गया है?ॐकार को व्यापक, प्रकृति-पुरुष से अतीत और प्रलय-उत्पत्ति से रहित कहा गया है।#ॐकार#प्रकृति#पुरुष
लोकपुरुष जड़ हो जाए तो क्या होता है?पुरुष की जड़ता से सृष्टि का स्पंदन रुक जाता है।#पुरुष#प्रकृति#स्पंदन
लोकपुरुष और प्रकृति का संबंध क्या है?पुरुष चेतना है और प्रकृति गति देने वाली ऊर्जा है।#पुरुष#प्रकृति#सांख्य
दर्शन एवं तत्त्वज्ञानसांख्य दर्शन में प्रकृति और पुरुषसांख्य में प्रकृति जड़ है (तीन गुणों की साम्यावस्था) और पुरुष चेतन। प्रकृति के विकार से सृष्टि बनती है। जब पुरुष प्रकृति के विकारों में स्वयं को मान लेता है — बन्धन होता है। तत्वज्ञान से 'मैं पुरुष हूँ, प्रकृति नहीं' — यह बोध मोक्ष देता है।#सांख्य दर्शन#प्रकृति#पुरुष
हिंदू दर्शनप्रकृति और पुरुष में अंतर सांख्य दर्शन अनुसारपुरुष = चेतन, साक्षी, निर्गुण, अपरिवर्तनशील (आत्मा)। प्रकृति = जड़, सक्रिय, त्रिगुणात्मक, परिवर्तनशील (शरीर-मन-जगत)। दुःख = पुरुष का प्रकृति से भ्रमवश तादात्म्य। ज्ञान = 'मैं पुरुष हूं, प्रकृति नहीं' = मोक्ष। 25 तत्व: 24 प्रकृति + 1 पुरुष।#सांख्य#प्रकृति#पुरुष