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विस्तृत उत्तर
ॐकार को प्रकृति और पुरुष से अतीत कहा गया है। उसे व्यापक भी बताया गया है और प्रलय तथा उत्पत्ति से रहित भी कहा गया है। इसलिए ॐकार का स्वरूप सामान्य उत्पत्ति-प्रलय के चक्र से परे रखा गया है। उसे केवल प्रकृति या पुरुष के भीतर सीमित तत्त्व नहीं, बल्कि उनसे अतीत और व्यापक शब्दब्रह्मस्वरूप बताया गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 1, PDF पृष्ठ 15, श्लोक 20-21
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