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विस्तृत उत्तर
सृष्टि, स्थिति और संहार जगत् से जुड़े तीन मूल भाव हैं। सदाशिव को जगत् की उत्पत्ति, स्थिति और अंत का कारण कहा गया है। आगे महेश्वर शिव को सृष्टि, पालन और संहाररूप लीला के लिए लिङ्गस्वरूप धारण करनेवाला बताया गया है। इस आधार पर सृष्टि का संबंध उत्पत्ति से, स्थिति का संबंध पालन या बने रहने से, और संहार का संबंध अंत से जुड़ता है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 1, PDF पृष्ठ 13-15, श्लोक 1 और 23-24
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