ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
टैग

महेश्वर से जुड़े सभी प्रश्न(40)

महेश्वर पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 40 प्रश्न उपलब्ध हैं।

शिव तत्त्व

शिव सगुण और निर्गुण कैसे हैं?

विष्णु ने कहा कि महादेव ने अपने को सगुण और निर्गुण दो रूपों में विभाजित किया; निर्गुण अव्यक्त और सगुण महेश्वर रूप में हैं।

#सगुण#निर्गुण#महेश्वर
वरदान

विष्णु ने शिव से कौन सा वर मांगा?

विष्णु ने वर माँगा कि ब्रह्मा और विष्णु दोनों की महादेव के प्रति सदा दृढ़ भक्ति बनी रहे।

#विष्णु#शिव#वरदान
लिंग तत्त्व

शिवलिंग को लिंग क्यों कहा जाता है?

क्योंकि यह समग्र जगत को अपने में लय करता है, इसलिए इसे लिंग कहा गया है।

#शिवलिंग#लिंग#जगत का लय
लिंग तत्त्व

शिवलिंग का असली अर्थ क्या है?

समग्र जगत को अपने में लय करने के कारण इसे लिंग कहा गया है।

#शिवलिंग#लिंग अर्थ#लय
शिवलिंग पूजा

शिवलिंग में शिव और पार्वती कैसे माने जाते हैं?

लिंगवेदी के रूप में महादेवी पार्वती और लिंगरूप में साक्षात् महेश्वर प्रतिष्ठित बताए गए हैं।

#शिवलिंग#पार्वती#महेश्वर
शिव नाम

शिव को महायोगी क्यों कहा गया है?

स्तुति में शिव को रोग-विकारशून्य अनन्त, शाश्वत, वरिष्ठ, वारिगर्भ और महायोगी महेश्वर कहा गया है।

#महायोगी#महेश्वर#अनन्त शिव
विष्णु स्तुति

विष्णु ने शिव की स्तुति कैसे की?

विष्णु ने शिव को अनेक नामों और रूपों से नमस्कार किया, जैसे प्रणवरूप रुद्र, महादेव, ईशान, लिंग, लिंगी, ओंकार और सर्वज्ञ।

#विष्णु#शिव स्तुति#महेश्वर
विष्णु स्तुति

विष्णु स्तुति क्या है?

विष्णु स्तुति वह स्तोत्र है जिसमें विष्णु ने रुद्र, शिव, महेश्वर, ओंकार, मोक्षदाता और विश्वगर्भ रूपों को नमस्कार किया।

#विष्णु स्तुति#महेश्वर#शिव
उमा-महेश्वर

उमा-महेश्वर कैसे प्रकट हुए?

ब्रह्मा-विष्णु की वैदिक स्तुति से प्रसन्न होकर महेश्वर लिंग में शब्दमय रूप से प्रकट हुए और उमा सहित दर्शन दिए।

#उमा महेश्वर#महेश्वर#लिंग
शब्दमय शिव

शब्दमय शिव रूप क्या है?

वेदमंत्रों से स्तुति के बाद महेश्वर लिंग में दिव्य शब्दमय रूप धारण कर प्रकट हुए, जिनका शरीर अक्षरों से बताया गया।

#शब्दमय शिव#महेश्वर#लिंग
लिंग तत्त्व

लिंगी किसे कहा गया है?

परमेश्वर को लिंगी कहा गया है, जबकि प्रधान को लिंग कहा गया है।

#लिंगी#परमेश्वर#लिंग
शिवस्थान

शिव का निर्विकार और निर्गुण स्थान क्या बताया गया है?

शिव का स्थान महेश्वर का निर्विकार, निर्गुण, विश्वरूप और ऐश्वर्यमय स्थान बताया गया है।

#निर्विकार#निर्गुण#विश्वरूप
अघोर उपासना

प्राणायाम और ध्यान से शिव की उपासना कैसे बताई गई है?

ध्यानयुक्त मन, प्राणायाम और हृदय में महेश्वर को धारण करके अघोररूप परमेश्वर की शरण लेना उपासना रूप में बताया गया है।

#प्राणायाम#ध्यान#उपासना
ब्रह्मा और अघोर

ब्रह्मा ने अघोर शिव की शरण कैसे ली?

ब्रह्मा ने अघोर शिव को महादेव जानकर प्रणाम किया, प्राणायाम और ध्यान से महेश्वर को हृदय में धारण किया और उनकी शरण ली।

#ब्रह्मा#अघोर#शरणागति
महेश्वरी धेनु

महेश्वर ने धेनु को ब्राह्मणों के कल्याण के लिए क्या बनाया?

महेश्वर ने धेनु को रुद्राणी और ब्राह्मणों के कल्याण के लिये परमार्थसाधिका बनाया।

#धेनु#ब्राह्मण कल्याण#परमार्थसाधिका
महेश्वरी धेनु

महेश्वर के मुख से निकली गाय कौन थी?

महेश्वर के मुख से निकली गाय विश्वरूपा, महेश्वरस्वरूपिणी, ईश्वररूपिणी धेनु थी, जिसे आगे रौद्री गायत्री रूप में बताया गया।

#महेश्वरी गाय#धेनु#रौद्री गायत्री
सद्योजात महिमा

सद्योजात शिव कौन हैं?

सद्योजात शिव को ब्रह्मा ने श्वेतलोहित कुमार रूप में देखा और साक्षात् परमेश्वर तथा परात्पर ब्रह्म जाना।

#सद्योजात#शिव#महेश्वर
शिवभक्ति

शिवभक्ति से मुक्ति कैसे मिलती है?

सर्वव्यापी परमेश्वर शिव में भक्ति रखने वाला प्राणी निःसंदेह मुक्ति प्राप्त करता है।

#शिवभक्ति#मुक्ति#परमेश्वर
शिव प्रसन्नता

शिव किन लोगों पर प्रसन्न होते हैं?

शिव संत, जितेन्द्रिय, धर्मज्ञ, साधु, आचार्य, दयावान्, तपस्वी, वैराग्यपरायण, ज्ञानी, दानी और सत्यवादी लोगों पर प्रसन्न होते हैं।

#शिव#महेश्वर#संत
मुक्ति और पाशुपत योग

पाशुपत योग में मन स्थिर क्यों रखना चाहिए?

शिव की महिमा अनंत है, इसलिए पाशुपत योग में निष्ठापूर्वक रहकर मन को सदा उसी में स्थिर रखना चाहिए।

#पाशुपत योग#मन स्थिर#शिव महिमा
शैव पद और वैराग्य

परम वैराग्य से कैसी मुक्ति मिलती है?

परम वैराग्य से शिव प्रसन्न होने पर साधक को विमल मुक्ति प्राप्त होती है।

#परम वैराग्य#विमल मुक्ति#महेश्वर
शैव पद और वैराग्य

वैराग्य से सिद्धियों का त्याग कैसे किया जाता है?

सिद्धियों को समाधि में विघ्न मानकर परम वैराग्य से रोकना और विषयभोगों की नश्वरता जानकर त्यागना चाहिए।

#वैराग्य#सिद्धि त्याग#औपसर्गिक सिद्धि
शिव ध्यान

हृदयकमल में शिव का ध्यान कैसे करना चाहिए?

हृदयकमल की कर्णिका में दीपशिखा जैसी आकृति वाले ओंकार नामक परमात्मा का ध्यान करना चाहिए।

#हृदयकमल#शिव ध्यान#दीपशिखा
योगावतार

नकुलीश कौन हैं?

नकुलीश अट्ठाईस योगाचार्यावतारों में अंतिम रूप से बताए गए जगद्गुरु हैं।

#नकुलीश#जगद्गुरु#योगाचार्य
योगावतार

वैवस्वत मन्वन्तर में महेश्वर के योगावतार कौन हैं?

वैवस्वत मन्वन्तर में महेश्वर के योगावतार श्वेत से लेकर नकुलीश तक अट्ठाईस योगाचार्यावतार बताए गए हैं।

#वैवस्वत मन्वन्तर#महेश्वर#योगावतार
कल्प और मन्वन्तर

श्वेतवाराह कल्प क्या है?

श्वेतवाराह कल्प वर्तमान कल्प बताया गया है, जिसमें सातवें वैवस्वत मन्वन्तर के योगावतारों का वर्णन आता है।

#श्वेतवाराह कल्प#वर्तमान कल्प#वैवस्वत मन्वन्तर
नरक और महादेव

महादेव गुणों के अनुसार कौन-कौन से रूप धारण करते हैं?

तमोगुण प्रधान होने पर वे कालरुद्र, रजोगुण प्रधान होने पर ब्रह्मा, सत्त्वगुण प्रधान होने पर विष्णु और गुणरहित होने पर महेश्वर रूप बताए गए हैं।

#महादेव#तमोगुण#रजोगुण
शिव तत्त्व

महेश्वर एक ही क्यों बताए गए हैं?

असंख्य कल्प, पितामह और विष्णु उत्पन्न होते हैं, पर महेश्वर मात्र एक बताए गए हैं।

#महेश्वर#असंख्य कल्प#ब्रह्मा
प्रलय

सृष्टि और प्रलय का कारण क्या बताया गया है?

गुणों की विषमता से सृष्टि और गुणों के साम्य से प्रलय बताया गया है; दोनों का हेतु महेश्वर हैं।

#सृष्टि#प्रलय#गुण
शिव तत्त्व

महेश्वर रजोगुण सत्त्वगुण और तमोगुण से कैसे जुड़े हैं?

महेश्वर सृष्टि में रजोगुण, पालन में सत्त्वगुण और प्रलय में तमोगुण से जुड़े बताए गए हैं।

#महेश्वर#रजोगुण#सत्त्वगुण
शिव तत्त्व

महेश्वर सृष्टि पालन और संहार कैसे करते हैं?

महेश्वर तीन रूपों में होकर सृष्टि, पालन और संहार करते हैं।

#महेश्वर#सृष्टि#पालन
शिव तत्त्व

रुद्र से संहार कैसे होता है?

तीन प्रधान देवों में रुद्र से जगत् का संहार बताया गया है और प्रलयकाल तमोगुण से जुड़ा है।

#रुद्र#संहार#तमोगुण
शिव तत्त्व

शिव लिंग रूप क्यों धारण करते हैं?

महेश्वर शिव सृष्टि, पालन और संहाररूप लीला के लिए लिङ्गस्वरूप धारण करते हैं।

#शिव#लिंग रूप#महेश्वर
गुण और देव रूप

महेश्वर का निर्गुण स्वरूप क्या है?

गुणों से रहित अवस्था को महेश्वरस्वरूप बताया गया है।

#महेश्वर#निर्गुण#शिव
गुण और देव रूप

तमोगुण रजोगुण सत्त्वगुण से कौन से रूप जुड़े हैं?

तमोगुण से कालरुद्र, रजोगुण से हिरण्यगर्भ, सत्त्वगुण से विष्णु और निर्गुण से महेश्वर रूप जुड़ता है।

#तमोगुण#रजोगुण#सत्त्वगुण
शिव तत्त्व

सृष्टि स्थिति और संहार क्या हैं?

सृष्टि उत्पत्ति, स्थिति पालन या स्थिरता, और संहार अंत से जुड़ा भाव है।

#सृष्टि#स्थिति#संहार
शिव-पार्वती तत्त्व: दार्शनिक रहस्य

श्वेताश्वतर उपनिषद में माया-तत्त्व का क्या वर्णन है?

श्वेताश्वतर उपनिषद: 'मायां तु प्रकृतिं विद्यान्मायिनं तु महेश्वरम्' — माया = प्रकृति (पार्वती), माया के स्वामी = महेश्वर (शिव)। पार्वती प्रत्येक जीव में कुंडलिनी शक्ति रूप में सुप्त हैं। सहस्रार में शिव से मिलने पर मोक्ष।

#श्वेताश्वतर उपनिषद#माया तत्त्व#महेश्वर
षोडशोपचार पूजन

पारद शिवलिंग पूजा में क्षमा प्रार्थना क्या है?

क्षमा प्रार्थना: 'मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं महेश्वर। यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु ते॥' — मेरी मंत्रहीन, क्रियाहीन पूजा आपकी कृपा से परिपूर्ण हो।

#क्षमा प्रार्थना#मंत्रहीनं क्रियाहीनं#महेश्वर
महेश्वर कवचम् परिचय और आधार

महेश्वर स्वरूप क्या है?

महेश्वर (महान ईश्वर) भगवान शिव का वह स्वरूप है जो उनकी कल्याणकारी, सहज कृपालु और सौम्य प्रकृति को दर्शाता है — यह हर जीव पर अनुकंपा बरसाने वाला स्वरूप है।

#महेश्वर#शिव स्वरूप#सौम्य
श्री रुद्र-कवच-संहिता

मुख और जिह्वा की रक्षा के लिए कौन से नाम दिए गए हैं?

मुख की रक्षा महेश्वर और जिह्वा की रक्षा वागीश स्वरूप करते हैं।

#महेश्वर#वागीश#अंग रक्षा
सम्पूर्ण प्रश्नोत्तरी
सभी प्रश्न देखें

10,000+ शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — श्रेणी, हब और टैग में सजे।

टैग खोज
अन्य टैग देखें

पूजा, मंत्र, साधना, उपाय, ज्योतिष — विषय अनुसार छाँटे गए सभी टैग।