शिव-पार्वती तत्त्व: दार्शनिक रहस्यश्वेताश्वतर उपनिषद में माया-तत्त्व का क्या वर्णन है?श्वेताश्वतर उपनिषद: 'मायां तु प्रकृतिं विद्यान्मायिनं तु महेश्वरम्' — माया = प्रकृति (पार्वती), माया के स्वामी = महेश्वर (शिव)। पार्वती प्रत्येक जीव में कुंडलिनी शक्ति रूप में सुप्त हैं। सहस्रार में शिव से मिलने पर मोक्ष।#श्वेताश्वतर उपनिषद#माया तत्त्व#महेश्वर
षोडशोपचार पूजनपारद शिवलिंग पूजा में क्षमा प्रार्थना क्या है?क्षमा प्रार्थना: 'मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं महेश्वर। यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु ते॥' — मेरी मंत्रहीन, क्रियाहीन पूजा आपकी कृपा से परिपूर्ण हो।
महेश्वर कवचम् परिचय और आधारमहेश्वर स्वरूप क्या है?महेश्वर (महान ईश्वर) भगवान शिव का वह स्वरूप है जो उनकी कल्याणकारी, सहज कृपालु और सौम्य प्रकृति को दर्शाता है — यह हर जीव पर अनुकंपा बरसाने वाला स्वरूप है।#महेश्वर#शिव स्वरूप#सौम्य
श्री रुद्र-कवच-संहितामुख और जिह्वा की रक्षा के लिए कौन से नाम दिए गए हैं?मुख की रक्षा महेश्वर और जिह्वा की रक्षा वागीश स्वरूप करते हैं।#महेश्वर#वागीश#अंग रक्षा