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विस्तृत उत्तर
शिवजी का प्रादुर्भाव मधु-कैटभ के संसर्ग से नष्ट ज्ञानवाले ब्रह्मा को परम ज्ञान देने के लिए बताया गया है। इसका अर्थ इतना ही है कि ब्रह्मा के ज्ञान के नष्ट हो जाने की स्थिति में शिव का प्रकट होना और उन्हें परम ज्ञान देना एक वर्णित विषय है। उसी क्रम में भगवान् विष्णु के मत्स्यरूप अवतार और लीलापूर्वक विष्णु की उत्पत्ति का उल्लेख भी आता है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 2, PDF पृष्ठ 19, श्लोक 39-40
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