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विस्तृत उत्तर
महेश्वर एक ही बताए गए हैं क्योंकि असंख्य कल्प, अनगिनत पितामह यानी ब्रह्मा और असंख्य विष्णु उत्पन्न होते हैं, किंतु महेश्वर मात्र एक हैं। यह कथन महेश्वर की एकत्व-स्थिति को असंख्य सृष्टि-चक्रों से ऊपर रखता है। गुणों की विषमता से सृष्टि और साम्य से प्रलय होने पर भी उनका हेतु वही महेश्वर बताए गए हैं।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 4, PDF पृष्ठ 28, श्लोक 54 1/2
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