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विस्तृत उत्तर
महेश्वर का निर्गुण स्वरूप गुणों से रहित अवस्था से जोड़ा गया है। पहले तमोगुण, रजोगुण और सत्त्वगुण से जुड़े रूपों का वर्णन आता है। फिर कहा गया है कि गुणों से रहित होने पर वही महेश्वरस्वरूप में प्रकट होता है। इसलिए महेश्वर का निर्गुण स्वरूप वह अवस्था है जहाँ तत्त्व किसी गुण-विशेष से सीमित नहीं है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 1, PDF पृष्ठ 15, श्लोक 22
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