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विस्तृत उत्तर
नैमिषारण्य एक तीर्थ के रूप में वर्णित है जहाँ ऋषि निवास कर रहे थे। नारदजी अनेक शिव-तीर्थों में भगवान् शंकर की यथोचित आराधना करके वहाँ पहुँचे। नैमिषारण्य के ऋषियों ने उन्हें देखकर प्रसन्न होकर पूजा की और आसन दिया। इसी स्थान पर सूतजी भी तपस्वी मुनियों को प्रणाम करने की इच्छा से आए।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 1, PDF पृष्ठ 13-14, श्लोक 2-8
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