विस्तृत उत्तर
नैमिषारण्य को भगवान विष्णु और देवताओं का परम पुण्यमय क्षेत्र बताया गया है। वहीं शौनकादि ऋषि भगवत प्राप्ति की इच्छा से एक महान यज्ञ कर रहे थे। वह यज्ञ सहस्र वर्ष में पूर्ण होने वाला बताया गया है। यह प्रसंग केवल सभा की जगह बताने के लिये नहीं है; इससे यह भी स्पष्ट होता है कि ऋषियों का उद्देश्य साधारण चर्चा नहीं, बल्कि भगवान की प्राप्ति और लोककल्याण से जुड़ा हुआ था। बाद में वे सूतजी का सम्मान करके उनसे कलियुग के जीवों के परम कल्याण का सहज साधन पूछते हैं। इसलिए नैमिषारण्य की सभा यज्ञ, श्रद्धा, भगवत प्राप्ति की इच्छा और हरि कथा सुनने की तैयारी से जुड़ी हुई है।
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