तीर्थ स्थलनैमिषारण्य तीर्थ कहाँ है और इसका महत्व?सीतापुर UP (लखनऊ ~90km), गोमती तट। 88,000 ऋषियों ने पुराण सुने। विष्णु चक्र से असुर नाश। चक्रतीर्थ, व्यास गद्दी। एक दिन निवास = लाखों वर्ष तप पुण्य।#नैमिषारण्य#लखनऊ#88000 ऋषि
श्रीमद्भागवतकलियुग से पार पाने में हरि कथा कैसे मदद करती है?ऋषि कहते हैं कि कलियुग अंतःकरण की पवित्रता और शक्ति को नष्ट करता है; उससे पार जाने वालों के लिये सूतजी कर्णधार जैसे मिले हैं।#कलियुग#हरि कथा#सूतजी
श्रीमद्भागवतनैमिषारण्य में ऋषि क्यों इकट्ठे हुए थे?शौनकादि ऋषि नैमिषारण्य में भगवत प्राप्ति की इच्छा से हजार वर्ष में पूर्ण होने वाला महान यज्ञ कर रहे थे।#नैमिषारण्य#ऋषि#यज्ञ
पुराण कथासूतजी कौन थे?सूतजी पुराणों के ज्ञाता, परम बुद्धिमान और व्यासजी से पुराणसंहिता प्राप्त करने वाले पौराणिक थे।#सूतजी#व्यासजी#पुराण
पुराण कथानैमिषारण्य क्या है?नैमिषारण्य वह तीर्थ है जहाँ ऋषि रहते थे और जहाँ नारदजी तथा सूतजी पहुँचे।#नैमिषारण्य#ऋषि#नारद
मरणोपरांत आत्मा यात्रानारायण बलि किन तीर्थों में किया जा सकता है?नारायण बलि गंगा, यमुना, नैमिषारण्य और पुष्कर जैसे तीर्थों में किया जा सकता है।#नारायण बलि तीर्थ#गंगा#यमुना
रामचरितमानस — बालकाण्डमनु-शतरूपा ने किस स्थान पर तपस्या की?नैमिषारण्य तीर्थ में, फिर गोमती नदी के किनारे। वहाँ मुनियों ने सब तीर्थ करा दिये। वल्कल वस्त्र धारण करके संत-समाज में नित्य पुराण सुनते और द्वादशाक्षर मन्त्र (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) का जप करते थे।#बालकाण्ड#मनु शतरूपा#नैमिषारण्य