विस्तृत उत्तर
हरि कथा को कलियुग से पार पाने की भूमिका में रखा गया है। ऋषि कहते हैं कि कलियुग आ गया है, इसलिए वे इस वैष्णव क्षेत्र में दीर्घकालीन सत्र का संकल्प लेकर बैठे हैं। उन्हें श्रीहरि की कथा सुनने का अवसर प्राप्त है। वे कलियुग को अंतःकरण की पवित्रता और शक्ति का नाश करने वाला बताते हैं और कहते हैं कि इससे पार पाना कठिन है। फिर वे सूतजी की तुलना समुद्र पार कराने वाले कर्णधार से करते हैं। जैसे समुद्र पार करने वालों को नाविक मिल जाए, वैसे ही कलियुग से पार पाने की इच्छा रखने वाले ऋषियों को ब्रह्मा ने सूतजी से मिलाया है। इसलिए हरि कथा, योग्य वक्ता और श्रद्धापूर्ण श्रवण को कलियुग से उबरने की दिशा में रखा गया है।
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