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कलियुग से जुड़े सभी प्रश्न(53)

कलियुग पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 53 प्रश्न उपलब्ध हैं।

दिव्यास्त्र

वायव्यास्त्र के ज्ञान का अंत कैसे हुआ?

कर्ण के पुत्र वृषकेतु की मृत्यु के साथ वायव्यास्त्र सहित कई दिव्यास्त्रों का ज्ञान पृथ्वी लोक से लुप्त हो गया। कलियुग के आगमन के साथ यह ज्ञान अप्राप्य हो गया।

#वायव्यास्त्र#ज्ञान लोप#वृषकेतु
दिव्यास्त्र

महाभारत युद्ध के बाद दिव्यास्त्रों का क्या हुआ?

महाभारत युद्ध के बाद द्वापर युग की समाप्ति और कलियुग के आगमन के साथ दिव्यास्त्रों का ज्ञान धीरे-धीरे पृथ्वी लोक से लुप्त हो गया।

#दिव्यास्त्र#महाभारत#कलियुग
नाम महिमा एवं भक्ति

कृष्ण नाम जपने से क्या विशेष लाभ है

कृष्ण नाम कलियुग का विशेष उपहार है। कलिसंतरणोपनिषद् का हरे कृष्ण महामंत्र कलियुग की सर्वोत्तम साधना है। कृष्ण आनंदस्वरूप हैं, अतः उनका नाम मन में दिव्य आनंद का प्रवाह लाता है। पद्मपुराण में इसके जप से गोलोक की प्राप्ति बताई गई है।

#कृष्ण नाम#कृष्ण नाम जप#नाम महिमा
युग वर्णन

कलियुग कब समाप्त होगा शास्त्रों के अनुसार?

कलियुग की कुल अवधि 4,32,000 वर्ष। प्रारंभ 3102 ई.पू. — अभी ~5,128 वर्ष बीते, ~4,26,872 शेष। अंत में कल्कि अवतार आएंगे, फिर सतयुग प्रारंभ। 'जल्दी समाप्त होगा' जैसे दावे शास्त्र-विरुद्ध हैं।

#कलियुग#युग चक्र#समाप्ति
दिव्यास्त्र

कलियुग में आग्नेयास्त्र का क्या हुआ?

कलियुग के आगमन के साथ आग्नेयास्त्र सहित सभी दिव्यास्त्रों का ज्ञान धीरे-धीरे लुप्त हो गया। धर्म के ह्रास और नैतिक-आध्यात्मिक क्षमता में कमी इसका कारण माना जाता है।

#आग्नेयास्त्र#कलियुग#लोप
धर्म मार्गदर्शन

कलियुग में धर्म पालन कैसे करें?

भागवत पुराण (12.3.51-52): कलियुग में कृष्ण नाम कीर्तन से मुक्ति। रामचरितमानस: 'कलियुग केवल नाम अधारा।' नाम जप, सत्य, दया, नित्य पूजा, गीता पाठ और सत्संग — कलियुग में धर्म पालन के सरलतम उपाय।

#कलियुग#धर्म पालन#भक्ति
तंत्र ग्रंथ

महानिर्वाण तंत्र का मुख्य विषय क्या है?

कलियुग तंत्र — सरल+उदार। ब्रह्म ज्ञान, कलियुग धर्म, पंचमकार (प्रतीकात्मक), सामाजिक सुधार (स्त्री/शूद्र अधिकार), दीक्षा, संस्कार। सबसे प्रगतिशील। Woodroffe अनुवाद।

#महानिर्वाण#तंत्र#विषय
श्रीमद्भागवत

कलियुग में भागवत को सूर्य क्यों कहा गया है?

कृष्ण के धाम जाने पर जब कलियुग में लोग अज्ञान-अंधकार से अंधे हो रहे थे, तब भागवत पुराण सूर्य के समान प्रकट हुआ।

#कलियुग#भागवत सूर्य#अज्ञान
श्रीमद्भागवत

कल्कि अवतार कब होगा?

कलियुग के अंत के समीप, जब राजा प्रायः लुटेरे हो जाएँगे, तब भगवान विष्णुयश ब्राह्मण के घर कल्कि रूप में अवतीर्ण होंगे।

#कल्कि अवतार#कलियुग#विष्णुयश
श्रीमद्भागवत

बुद्ध अवतार का उद्देश्य क्या बताया गया है?

बुद्ध अवतार कलियुग में मगध देश में देवताओं से द्वेष रखने वाले दैत्यों को मोहित करने के लिए बताया गया है।

#बुद्ध अवतार#कलियुग#मगध
श्रीमद्भागवत

कृष्ण के धाम जाने के बाद धर्म का सहारा क्या है?

ऋषि यही प्रश्न पूछते हैं कि धर्मरक्षक कृष्ण के धाम जाने पर धर्म ने अब किसकी शरण ली है।

#धर्म#कृष्ण#धाम
श्रीमद्भागवत

कलियुग से पार पाने में हरि कथा कैसे मदद करती है?

ऋषि कहते हैं कि कलियुग अंतःकरण की पवित्रता और शक्ति को नष्ट करता है; उससे पार जाने वालों के लिये सूतजी कर्णधार जैसे मिले हैं।

#कलियुग#हरि कथा#सूतजी
श्रीमद्भागवत

कलियुग के लोगों के लिए सहज कल्याण क्या है?

ऋषि सूतजी से यही पूछते हैं कि शास्त्रों का सार बताइए जिससे कलियुग के जीवों का परम कल्याण हो।

#कलियुग#सहज कल्याण#शास्त्र सार
श्रीमद्भागवत

कलियुग में शास्त्रों का सार क्यों जरूरी है?

क्योंकि लोग अल्पायु और बाधाग्रस्त हैं, शास्त्र बहुत हैं और उनमें अनेक कर्मों का वर्णन है; उनका एक अंश सुनना भी कठिन है।

#कलियुग#शास्त्र सार#कल्याण
श्रीमद्भागवत

कलियुग में मनुष्य की हालत कैसी बताई गई है?

कलियुग में मनुष्य अल्पायु, साधना में अरुचि वाला, आलसी, मंदबुद्धि, मंदभाग्य और अनेक बाधाओं से घिरा बताया गया है।

#कलियुग#मनुष्य#अल्पायु
श्रीमद्भागवत

सूतजी से ऋषियों ने क्या पूछा?

ऋषियों ने सूतजी से शास्त्रों का सार, कलियुग के जीवों का कल्याण, कृष्ण अवतार, हरि कथा और धर्म का आश्रय पूछा।

#सूतजी#ऋषि#प्रश्न
श्रीमद्भागवत

भागवत पुराण मनुष्य का कल्याण कैसे करती है?

यह परमात्मा का निरूपण करती है, तीन तापों का नाश बताती है और कलियुग के जीवों के लिये शास्त्रों का सार माँगा गया है।

#कल्याण#भागवत पुराण#कलियुग
युग मान

कलियुग कितने वर्ष का होता है?

कलियुग का नियत समय एक हजार दिव्य वर्ष और मानुषी वर्ष से तीन लाख साठ हजार वर्ष बताया गया है।

#कलियुग#युग मान#मानुष वर्ष
श्रीमद्भागवत

सप्ताह यज्ञ किन पापियों को सुधारता है?

पंचमहापाप, छल, क्रूरता, ब्राह्मण-धन से पोषण और मन-वाणी-शरीर से पाप करने वालों तक को सप्ताह यज्ञ से पवित्र कहा गया है।

#सप्ताह यज्ञ#महापाप#कलियुग
श्रीमद्भागवत

सप्ताह यज्ञ से कौन पवित्र होता है?

कहा गया है कि सप्ताह यज्ञ से पापी, दुराचारी, कुटिल, हिंसक और मन-वाणी-शरीर से पाप करने वाले भी पवित्र हो जाते हैं।

#भागवत सप्ताह#सप्ताह यज्ञ#पाप नाश
श्रीमद्भागवत

कलियुग में भागवत सप्ताह क्यों जरूरी है?

कलियुग में मन की चंचलता, रोग, अल्प आयु और दोषों के कारण सात दिन का भागवत श्रवण विशेष रूप से बताया गया है।

#कलियुग#भागवत सप्ताह#आयु
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह क्यों करें?

भागवत सप्ताह को कलियुग में दुख, दारिद्र्य, दुर्भाग्य, पाप और काम-क्रोध पर विजय का साधन कहा गया है।

#भागवत सप्ताह#कलियुग#दुख निवारण
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह क्या है?

भागवत सप्ताह सात दिनों में श्रीमद्भागवत श्रवण की वह विधि है जिसे कलियुग के लिये विशेष साधन बताया गया है।

#भागवत सप्ताह#सप्ताह श्रवण#कलियुग
श्रीमद्भागवत

कलियुग के दोष कैसे मिटते हैं?

स्रोत के अनुसार श्रीमद्भागवत की ध्वनि से कलियुग के दोष वैसे मिटते हैं जैसे सिंह-गर्जना से भेड़िये भागते हैं।

#कलियुग#दोष#भागवत
श्रीमद्भागवत

भागवत पारायण क्यों करें?

सनकादि के अनुसार श्रीमद्भागवत पारायण भक्ति, ज्ञान और वैराग्य को बल देकर कलियुग के दोष दूर करता है।

#भागवत पारायण#ज्ञान यज्ञ#भक्ति
श्रीमद्भागवत

भक्ति क्यों जरूरी है?

कलियुग में भक्ति को मोक्षदायिनी, कृष्ण को वश में करने वाली और भय दूर करने वाली कहा गया है।

#भक्ति#मोक्ष#कृष्ण
श्रीमद्भागवत

कृष्ण को कैसे पाएं?

स्रोत के अनुसार भगवान कृष्ण भक्ति से प्राप्त होते हैं; कलियुग में भक्ति ही सार है।

#कृष्ण#भक्ति#भगवान
श्रीमद्भागवत

मोक्ष कैसे मिले?

कलियुग में मोक्ष का मुख्य साधन भक्ति और श्रीमद्भागवत पारायण बताया गया है।

#मोक्ष#भक्ति#कलियुग
श्रीमद्भागवत

कलियुग में क्या करें?

कलियुग के लिये कृष्ण-स्मरण, भक्ति और श्रीमद्भागवत पारायण को मुख्य साधन बताया गया है।

#कलियुग#भक्ति#श्रीमद्भागवत
श्रीमद्भागवत

कलियुग में ध्यान योग कठिन क्यों हो गया?

नारदजी बताते हैं कि मन पर नियंत्रण न होना, लोभ, दंभ, पाखंड और शास्त्र-अभ्यास की कमी ध्यानयोग का फल घटाते हैं।

#ध्यान योग#कलियुग#मन
श्रीमद्भागवत

कलियुग में तपस्या का सार क्यों घट गया?

कहा गया है कि काम, क्रोध, लोभ और तृष्णा से चित्त व्याकुल होने पर तप का सार घट जाता है।

#कलियुग#तपस्या#लोभ
श्रीमद्भागवत

कलियुग में तीर्थों का प्रभाव क्यों घटता है?

नारदजी के अनुसार तीर्थों में अधर्म और नास्तिक वृत्ति बढ़ने से उनका सार घट गया।

#कलियुग#तीर्थ#धर्म
श्रीमद्भागवत

कलियुग में मन की शांति कैसे मिले?

मन की शांति के लिये श्रीमद्भागवत श्रवण, भक्ति और केशव-कीर्तन का मार्ग दिखाया गया है।

#मन की शांति#कलियुग#श्रीमद्भागवत
श्रीमद्भागवत

कलियुग में पाप और पाखंड क्यों बढ़ता है?

स्रोत के अनुसार लोभ, असत्य, सदाचार का अभाव, शास्त्र-अभ्यास की कमी और दिखावे से पाप-पाखंड बढ़ता है।

#कलियुग#पाप#पाखंड
श्रीमद्भागवत

कलियुग के मुख्य दोष क्या हैं?

असत्य, आलस्य, पाखंड, लोभ, सदाचार का अभाव और साधनों का सार घटना कलियुग के दोष बताए गए हैं।

#कलियुग#दोष#अधर्म
श्रीमद्भागवत

कलियुग में धर्म क्यों घट रहा है?

धर्म-क्षय का कारण सत्य, तप, शौच, दया, दान, साधना और सदाचार का घटना बताया गया है।

#कलियुग#धर्म#अधर्म
श्रीमद्भागवत

क्या हरि कीर्तन से तप और योग का फल मिलता है?

हाँ, कहा गया है कि कलियुग में केशव-कीर्तन से वह फल मिलता है जो तप, योग और समाधि से भी दुर्लभ है।

#हरि कीर्तन#तप#योग
श्रीमद्भागवत

कलियुग में हरि कीर्तन का क्या महत्व है?

नारदजी कहते हैं कि कलियुग में केशव-कीर्तन से वह फल मिलता है जो तप, योग और समाधि से भी दुर्लभ है।

#हरि कीर्तन#कलियुग#केशव
श्रीमद्भागवत

कलियुग में भगवान कृष्ण को कैसे प्रसन्न करें?

श्रीमद्भागवत को भगवान कृष्ण की प्रसन्नता और भक्ति-वृद्धि का साधन कहा गया है।

#भगवान कृष्ण#कलियुग#भागवत कथा
श्रीमद्भागवत

कलियुग में मोक्ष का सबसे आसान उपाय क्या है?

कलियुग के लिये श्रीमद्भागवत का श्रवण और केशव-कीर्तन मोक्षदायक साधन बताए गए हैं।

#कलियुग#मोक्ष#हरि कीर्तन
लोक

श्राद्ध में मांस-मदिरा क्यों वर्जित है?

श्राद्ध में मांस और मदिरा वर्जित हैं; सात्विक भोजन ही उचित है।

#मांस मदिरा#श्राद्ध निषेध#कलियुग
स्मृति शास्त्र

पराशर स्मृति किसने रची है?

पराशर स्मृति को कलियुग के धर्म-नियंता महर्षि पराशर ने रचा है। इसमें पितरों के श्राद्ध और सूतक-पातक अशौच के समय शुद्धिकरण के कठोर नियमों का विस्तार से वर्णन है। यह कलियुग के लिए विशेष रूप से रची गई है, और इसमें स्पष्ट तथा व्यावहारिक नियम हैं।

#पराशर स्मृति#महर्षि पराशर#कलियुग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

कलियुग में मांस के स्थान पर क्या दिया जाता है?

कलियुग में मांस के स्थान पर केले या अन्य सात्त्विक द्रव्य दिए जाते हैं।

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मरणोपरांत आत्मा यात्रा

शास्त्रों में प्रेत को मांस की आवश्यकता का क्या उल्लेख है?

शास्त्रों में प्रेत के लिए मांस का उल्लेख है, पर कलियुग में उसके स्थान पर केले या सात्त्विक द्रव्य दिए जाते हैं।

#प्रेत#मांस#कलियुग
रामचरितमानस — बालकाण्ड

कलियुग की तुलना किससे की गई बालकाण्ड में?

कालनेमि (कपट की खान) — 'कालनेमि कलि कपट निधानू। नाम सुमति समरथ हनुमानू।' कलियुग में राम नाम ही एकमात्र आधार।

#बालकाण्ड#कलियुग#कालनेमि
रामचरितमानस — बालकाण्ड

कलियुग में मुक्ति का एकमात्र उपाय क्या बताया गया है रामचरितमानस में?

कलियुग में राम नाम ही एकमात्र आधार है। तुलसीदासजी ने कहा — 'नहिं कलि करम न भगति बिबेकू। राम नाम अवलंबन एकू।' कलियुग में न कर्म है, न भक्ति, न ज्ञान — केवल राम नाम ही उपाय है।

#बालकाण्ड#कलियुग#राम नाम
भक्ति एवं आध्यात्म

नाम संकीर्तन का आध्यात्मिक लाभ क्या है

नाम-संकीर्तन के लाभ — चित्त-शुद्धि, पाप-नाश, भक्ति-उदय और मोक्ष। भागवत 12.3.52 के अनुसार यह कलियुग में सतयुग के तप, त्रेता के यज्ञ और द्वापर की पूजा का फल देता है। देश-काल का कोई बंधन नहीं।

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भक्ति एवं आध्यात्म

नवधा भक्ति में कौन सी भक्ति सबसे सरल है

प्रह्लाद के अनुसार श्रवण सर्वश्रेष्ठ है। कलियुग के लिए नाम-संकीर्तन सबसे सुलभ है — देश-काल का कोई बंधन नहीं। जो स्वभाव से सहज लगे वही सबसे सरल भक्ति है।

#नवधा भक्ति#श्रवण#सरल भक्ति
हिंदू दर्शन

कलियुग में तंत्र मंत्र अधिक प्रभावी क्यों माने जाते हैं

महानिर्वाण तंत्र — कलियुग में मंत्र जप सर्वाधिक प्रभावी (सतयुग=ध्यान, त्रेता=यज्ञ, द्वापर=पूजा)। कारण: आयु-शक्ति-एकाग्रता कम, अतः सरल मार्ग। 'कलियुग केवल नाम अधारा।' सावधानी: तंत्र ≠ काला जादू; गुरु आवश्यक; सात्विक तंत्र ही शास्त्रसम्मत।

#कलियुग#तंत्र#मंत्र
हिंदू दर्शन

सतयुग से कलियुग तक धर्म कैसे बदला

धर्म = चार पैरों का बैल (सत्य, दया, तप, दान)। सतयुग=4 पैर (ध्यान), त्रेता=3 (यज्ञ, राम), द्वापर=2 (पूजा, कृष्ण), कलियुग=1 (नाम जप)। कलियुग में धर्म क्षीण पर मोक्ष सरल — 'कलियुग केवल नाम अधारा।' कल्कि अवतार से पुनः सतयुग।

#युग#सतयुग#कलियुग
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