विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवतमाहात्म्य में कलियुग के अनेक दोष बताए गए हैं, लेकिन उसी के भीतर हरि-कीर्तन का विशेष महत्व भी बताया गया है। भक्ति जब नारदजी से पूछती है कि राजा परीक्षित ने कलियुग को क्यों रहने दिया, तब नारदजी उत्तर देते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण के धाम जाने के दिन से कलियुग आया। दिग्विजय के समय कलियुग राजा परीक्षित की शरण में आया, इसलिए उन्होंने उसे मारना उचित नहीं समझा। नारदजी फिर कलियुग का एक बड़ा सार बताते हैं: जो फल तप, योग और समाधि से भी प्राप्त नहीं होता, वह कलियुग में केशव-कीर्तन से मिल जाता है। इसी एक गुण को देखकर परीक्षित ने कलियुग को जीवों के हित के लिये रहने दिया। इसलिए स्रोत के अनुसार हरि-कीर्तन कलियुग का केंद्रीय साधन है। यह कठिन साधनाओं के फल को भगवान के नाम-स्मरण और कीर्तन द्वारा उपलब्ध कराने वाला बताया गया है।
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