विस्तृत उत्तर
सनकादि सप्ताह यज्ञ की शुद्धि-शक्ति को बहुत विस्तार से बताते हैं। वे कहते हैं कि मदिरापान, ब्रह्महत्या, सुवर्ण की चोरी, गुरु-पत्नी गमन और विश्वासघात जैसे पंचमहापाप करने वाले भी कलियुग में सप्ताह यज्ञ से पवित्र हो सकते हैं। छल-छद्म में लगे, क्रूर, पिशाचों जैसे निर्दयी, ब्राह्मण के धन से पुष्ट और भ्रष्ट आचरण वाले लोगों का भी उल्लेख किया गया है। जो लोग मन, वाणी या शरीर से हठपूर्वक पाप करते रहते हैं, दूसरों के धन से पलते हैं और जिनका मन तथा हृदय मलिन है, वे भी सप्ताह यज्ञ से पवित्र कहे गए हैं। इसी बात को समझाने के लिये आगे गोकर्ण और धुंधुकारी की प्राचीन कथा आरंभ होती है।
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