विस्तृत उत्तर
हाँ, श्रीमद्भागवतमाहात्म्य में नारदजी यही कहते हैं। भक्ति के प्रश्न के उत्तर में वे बताते हैं कि कलियुग बहुत दोषों से भरा है और अनेक साधनों का सार घट गया है, फिर भी इसमें एक बड़ा लाभ है। वे कहते हैं कि जो फल तपस्या से नहीं मिलता, योग से नहीं मिलता और समाधि से भी नहीं मिलता, वह कलियुग में केशव-कीर्तन से मिल जाता है। इसी कारण राजा परीक्षित ने कलियुग को पूर्ण नष्ट नहीं किया। उन्होंने देखा कि यह युग सारहीन होते हुए भी भगवान के कीर्तन के कारण सारयुक्त है। हरि-कीर्तन को तप, योग और समाधि के कठिन मार्गों का विकल्प नहीं बल्कि कलियुग में उनका फल देने वाला विशेष साधन बताया गया है। इसका केंद्र भगवान के नाम और कृष्ण-स्मरण में है।
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