विस्तृत उत्तर
दिव्यास्त्रों का युग मुख्यतः त्रेता और द्वापर युग में अधिक प्रचलित माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि कलियुग के आगमन के साथ दिव्यास्त्रों का ज्ञान और उनके प्रयोग की क्षमता धीरे-धीरे लुप्त हो गई। इसके पीछे एक कारण धर्म का ह्रास और मनुष्यों की नैतिक और आध्यात्मिक क्षमता में कमी को भी माना जा सकता है। जैसे-जैसे युग आगे बढ़े दिव्यास्त्रों का प्रयोग भी अधिक विनाशकारी और कम नैतिकतापूर्ण होता गया जैसा कि महाभारत के अंत में अश्वत्थामा के कृत्यों से स्पष्ट है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





