विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवतमाहात्म्य में श्रीमद्भागवत पारायण को आकाशवाणी में बताये गए सत्कर्म का अर्थ बताया गया है। सनकादि ऋषि नारदजी से कहते हैं कि यज्ञ, तपोयज्ञ, योगयज्ञ और स्वाध्याय आदि कर्म स्वर्गादि फल की ओर संकेत करते हैं, पर पंडितों ने ज्ञानयज्ञ को सत्कर्म का सूचक माना है। वही श्रीमद्भागवत का पारायण है, जिसका गान शुकादि महानुभावों ने किया है। उसके शब्द सुनने से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य को बल मिलता है, ज्ञान-वैराग्य का कष्ट मिटता है और भक्ति को आनंद मिलता है। वे यह भी कहते हैं कि जैसे सिंह की गर्जना सुनकर भेड़िये भाग जाते हैं, वैसे ही श्रीमद्भागवत की ध्वनि से कलियुग के दोष नष्ट हो जाते हैं। इसलिए भागवत पारायण भक्ति, ज्ञान, वैराग्य की स्थापना और कलियुग-दोष-नाश के लिये करना चाहिए।
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