विस्तृत उत्तर
भागवत पुराण मनुष्य का कल्याण कई स्तरों पर करती हुई दिखाई गई है। इसमें उस परमात्मा का निरूपण है जो तीन तापों का मूल से नाश करता है और परम कल्याण देता है। सुकृती पुरुष जब इसके श्रवण की इच्छा करते हैं, तो ईश्वर शीघ्र उनके हृदय में आकर बंध जाता है। आगे ऋषि सूतजी से कहते हैं कि कलियुग में लोग अल्पायु, आलसी, दुर्बुद्धि, मंदभाग्य और बाधाओं से घिरे हुए हैं; बहुत से शास्त्र भी कठिन हैं। इसलिए वे शास्त्रों का सार पूछते हैं जिससे प्राणियों का परम कल्याण और अंतःकरण की शुद्धि हो। भगवान के अवतार को भी जीवों के परम कल्याण और भगवत प्रेममयी समृद्धि के लिये बताया गया है।
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