विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत को कलियुग का पुराण-सूर्य कहा गया है। पाठ कहता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण धर्म, ज्ञान आदि के साथ अपने परमधाम को पधार गए, तब कलियुग में लोग अज्ञानरूपी अंधकार से अंधे हो रहे थे। ऐसे समय यह पुराणरूपी सूर्य प्रकट हुआ। सूर्य अंधकार हटाता है; उसी तरह भागवत अज्ञान के अंधकार को दूर करने वाला प्रकाश है। यह बात उसी क्रम में आती है जहाँ बताया गया कि व्यास ने भागवत को लोकों के परम कल्याण के लिए बनाया, शुकदेवजी को दिया और शुकदेवजी ने गंगातट पर परीक्षित को सुनाया। इसलिए कलियुग में भागवत को सूर्य कहना उसके ज्ञान, कल्याण और अज्ञान-नाशक प्रकाश का संकेत है।
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