विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवतमाहात्म्य में नारदजी स्वयं बताते हैं कि वे पुष्कर, प्रयाग, काशी, गोदावरी, हरिद्वार, कुरुक्षेत्र, श्रीरंग और सेतुबन्ध जैसे तीर्थों में गए। फिर भी उन्हें कहीं मन को संतोष देने वाली शांति नहीं मिली। इसका कारण वे कलियुग के प्रभाव में बताते हैं। आगे वे कहते हैं कि तीर्थों में भी अत्यंत घोर कर्म करने वाले, नास्तिक और नरकगामी प्रवृत्ति वाले लोग रहने लगे हैं, इसलिए तीर्थों का सार चला गया। इसी व्यापक वर्णन में वे यह भी बताते हैं कि सत्य, तप, शौच, दया, दान और सदाचार घट गए हैं। स्रोत के अनुसार तीर्थों का प्रभाव इसलिए घटता है क्योंकि तीर्थ-स्थानों में भी अधर्म, नास्तिकता और पापपूर्ण आचरण प्रवेश कर जाते हैं। वर्णन तीर्थों को अस्वीकार नहीं करता; वह यह बताता है कि कलियुग में अधर्म के कारण तीर्थ-सार ढक जाता है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





