विस्तृत उत्तर
कलियुग में मनुष्य की स्थिति बहुत कमजोर बताई गई है। ऋषि सूतजी से कहते हैं कि इस युग में प्रायः लोगों की आयु कम हो गई है। साधन करने में उनकी रुचि और प्रवृत्ति भी नहीं रहती। लोग आलसी हो गए हैं। उनका भाग्य मंद है और समझ भी थोड़ी है। इसके साथ वे अनेक प्रकार की विघ्न-बाधाओं से घिरे रहते हैं। यह वर्णन केवल दोष गिनाने के लिये नहीं है; इसी कारण ऋषि शास्त्रों का सार और सहज कल्याणकारी साधन पूछते हैं। जब मनुष्य की आयु, शक्ति, बुद्धि, रुचि और परिस्थिति सभी कमजोर हों, तब कठिन और विस्तृत साधनों के बजाय ऐसा सार चाहिए जो वास्तविक कल्याण और अंतःकरण की शुद्धि कर सके।
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