विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवतमाहात्म्य में कृष्ण को पाने का मार्ग भक्ति बताया गया है। नारदजी भक्ति से कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण के चरणकमलों का चिंतन करो, उनकी कृपा से दुख दूर होगा। वे यह भी कहते हैं कि श्रीकृष्ण कहीं चले नहीं गए; वे वही हैं जिन्होंने द्रौपदी की रक्षा की और गोपसुंदरियों को सनाथ किया। भक्ति तो उन्हें प्राणों से भी प्रिय है और भक्ति के बुलाने पर भगवान नीच घरों में भी चले जाते हैं। आगे नारदजी कहते हैं कि तप, वेदाध्ययन, ज्ञान और कर्म से भगवान वश में नहीं होते; वे भक्ति से वश में होते हैं, और गोपियां इसका प्रमाण हैं। कलियुग में केवल भक्ति ही सार है और भक्ति से श्रीकृष्ण सामने उपस्थित हो जाते हैं। स्रोत के अनुसार कृष्ण को पाने का उपाय भक्ति, कृष्ण-स्मरण और प्रेमपूर्वक भगवान का आश्रय है।
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