विस्तृत उत्तर
नारदजी सप्ताह श्रवण की अलौकिक महिमा देखकर पूछते हैं कि इस कथामय सप्ताह यज्ञ से कौन-कौन पवित्र हो सकते हैं। सनकादि उत्तर देते हैं कि कलियुग में सदा पाप करने वाले, दुराचार में लगे हुए, विपरीत मार्ग पर चलने वाले, क्रोध से जलने वाले, कुटिल और कामपरायण लोग भी सप्ताह यज्ञ से पवित्र हो जाते हैं। वे आगे सत्य से रहित, माता-पिता की निंदा करने वाले, तृष्णा से व्याकुल, आश्रमधर्म से रहित, दंभी, ईर्ष्यालु और दूसरों को दुख देने वाले लोगों का भी उल्लेख करते हैं। इस तरह कथा का आरंभ यह बताता है कि भागवत सप्ताह मनुष्य के भीतर जमा पाप और मल को शुद्ध करने वाला उपाय है।
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