विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवतमाहात्म्य में भागवत सप्ताह को सात दिन में श्रीमद्भागवत सुनने की विशेष विधि के रूप में बताया गया है। सनकादि कहते हैं कि आदर्श रूप में कथा का सदा श्रवण श्रेष्ठ है, पर कलियुग में मन की चंचलता, रोगों की अधिकता, आयु की कमी और दोषों की संभावना के कारण लंबा नियम निभाना कठिन है। इसलिए सप्ताह श्रवण का विधान किया गया। आगे कहा गया है कि जो फल तप, योग और समाधि से भी सहज नहीं मिलता, वह सप्ताह श्रवण से अनायास मिल जाता है। बाद में सूतजी बताते हैं कि कलियुग में अन्य साधनों को पीछे रखकर सप्ताह श्रवण को प्रधान धर्म कहा गया है।
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