विस्तृत उत्तर
रामचरितमानस के बालकाण्ड में तुलसीदासजी ने स्पष्ट कहा है कि कलियुग में राम नाम ही मुक्ति का एकमात्र उपाय है।
चौपाई — 'नहिं कलि करम न भगति बिबेकू। राम नाम अवलंबन एकू। कालनेमि कलि कपट निधानू। नाम सुमति समरथ हनुमानू॥'
इसका अर्थ — कलियुगमें न कर्म है, न भक्ति है और न ज्ञान ही है; रामनाम ही एक आधार है। कपटकी खान कलियुगरूपी कालनेमि (राक्षस) को मारनेके लिये रामनाम ही बुद्धिमान् और समर्थ श्रीहनुमानजी हैं।
साथ ही पहले कहा गया था — 'चहु जुग चहुँ श्रुति नाम प्रभाऊ। कलि बिसेषि नहिं आन उपाऊ॥' अर्थ — चारों युगोंमें और चारों ही वेदोंमें नामका प्रभाव है, परन्तु कलियुगमें विशेषरूपसे (नामको छोड़कर) दूसरा कोई उपाय ही नहीं है।
इसकी शिक्षा — कलियुग में कर्मकाण्ड, ज्ञानमार्ग आदि कठिन हैं, किन्तु राम नाम का जप सरल, सुलभ और सबसे प्रभावशाली उपाय है।





