विस्तृत उत्तर
महाभारत युद्ध को अक्सर एक युग के अंत (द्वापर युग की समाप्ति और कलियुग का प्रारंभ) के रूप में देखा जाता है। इसके पश्चात दिव्यास्त्रों का प्रयोग और उनका ज्ञान धीरे-धीरे कम होता गया या लुप्त हो गया। एक संदर्भ में वृषकेतु (कर्ण के पुत्र) की मृत्यु के साथ ब्रह्मास्त्र, वरुणास्त्र, अग्नि और वायुस्त्र जैसे दिव्यास्त्रों के ज्ञान के पृथ्वी लोक से चले जाने का उल्लेख है। कलियुग के आगमन और मानवीय क्षमताओं में परिवर्तन के साथ ऐसे शक्तिशाली दिव्यास्त्रों का प्रयोग और ज्ञान अप्रासंगिक या अप्राप्य हो गया।
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