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विस्तृत उत्तर
सूतजी को पुराणों के ज्ञाता, परम बुद्धिमान और पौराणिकों में श्रेष्ठ बताया गया है। वे तपस्वी मुनियों को प्रणाम करने की इच्छा से नैमिषारण्य तीर्थ में आए। ऋषियों ने उनकी स्तुति और पूजा की। ऋषियों के अनुसार सूतजी ने पुराणों का ज्ञान पाने के लिए श्रीकृष्णद्वैपायन व्यासजी की उपासना की और उनसे पुराणसंहिता प्राप्त की थी।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 1, PDF पृष्ठ 13-14, श्लोक 7-12
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