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विस्तृत उत्तर
सूतजी कथा आरंभ करने से पहले देवर्षि नारद और नैमिषारण्यवासी मुनियों का अभिवादन करते हैं। इसके बाद वे शिव, ब्रह्मा, विष्णु और मुनीश्वर व्यासजी को नमस्कार करके लिङ्गपुराण की कथा कहने के लिए उसमें प्रतिपादित विषय का स्मरण करते हैं। इस तरह कथा का आरंभ सम्मान, प्रणाम और स्मरण से होता है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 1, PDF पृष्ठ 14, श्लोक 16-18
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