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विस्तृत उत्तर
विष्णु ने शिव से दृढ़ भक्ति का वर माँगा। उन्होंने लिंग में विराजित और स्वेच्छा से विग्रह धारण करने वाले महेश्वर को प्रणाम किया। फिर प्रसन्न मन से कहा कि यदि महादेव के हृदय में उनके प्रति प्रीति हुई है और वे वर देना चाहते हैं, तो यही वर दें कि महादेव के प्रति दोनों की सदा दृढ़ भक्ति बनी रहे। महादेव ने ब्रह्मा और विष्णु को अपनी अचल श्रद्धा-भक्ति प्रदान कर दी।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 19, PDF पृष्ठ 86-87, श्लोक 5-7
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