विस्तृत उत्तर
ज्योतिर्मय अग्नि-स्तंभ वह दिव्य लिंग था जो ब्रह्मा और विष्णु के सामने प्रकट हुआ। दोनों के कलह को दूर करने और ज्ञान देने के लिए यह लिंग प्रकट बताया गया है। इसका स्वरूप हजारों अग्नि-ज्वालाओं से व्याप्त, सैकड़ों कालाग्नि के समान, क्षय-वृद्धि से रहित, आदि-मध्य-अन्त से हीन, अनुपम, अवर्णनीय और अव्यक्त कहा गया है। विष्णु ने इसे अग्नि से उद्भूत लिंग कहा और उसके मूल का पता लगाने के लिए नीचे जाने का निर्णय किया।
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