विस्तृत उत्तर
त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के नासिक जिले में ब्रह्मगिरि पर्वत के पास त्र्यंबक गाँव में स्थित है। गोदावरी नदी का उद्गम इसी पर्वत से होता है। 'त्र्यंबक' का अर्थ है 'तीन नेत्रों वाले' — यहाँ एक अनूठी विशेषता है कि लिंग में तीन मुख हैं जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक हैं।
शिव पुराण की इस ज्योतिर्लिंग की कथा महर्षि गौतम से जुड़ी है। प्राचीन काल में ब्रह्मगिरि पर्वत पर महर्षि गौतम अपनी पत्नी अहिल्या के साथ तपस्या करते थे। एक बार वहाँ बड़ा सूखा पड़ा। गौतम ऋषि ने वरुण देव की कठोर तपस्या की और क्षेत्र में जल प्राप्त किया। इससे ईर्ष्यालु अन्य ऋषियों ने गणेश जी की आराधना करके गौतम पर गोहत्या का षड्यंत्रपूर्वक आरोप लगाया।
इस पाप से मुक्ति के लिए गौतम ऋषि ने शिव की घोर तपस्या की और उनसे गंगा को उस स्थान पर लाने का वरदान माँगा। शिव जी प्रसन्न होकर प्रकट हुए। गंगा ने शर्त रखी — 'यदि शिव भी यहाँ विराजेंगे तो मैं आऊँगी।' शिव ने स्वीकार किया और त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में यहाँ विराजित हो गए। गंगा यहाँ 'गोदावरी' (गौतमी) नाम से प्रकट हुई। यह दक्षिण की गंगा कही जाती है।





